Water Lifting System of Amer Fort, इसमें आमेर महल की ऐतिहासिक जल उत्थान प्रणाली के बारे में जानकारी दी गई है।
राजस्थान के ऐतिहासिक आमेर महल में जल आपूर्ति प्रबंधन का एक बेजोड़ उदाहरण देखने को मिलता है। उस दौर में महल में पानी की आपूर्ति मुख्य रूप से मावठा झील के पानी पर निर्भर थी।
झील से पानी को ऊपर महल तक पहुँचाने के लिए पशु बल (draught animals), चरखियों, चमड़े के थैलों (चड़स) और रहट जैसी प्राचीन तकनीकों का बेहद कुशलता से उपयोग किया जाता था।
यह पूरी जल उत्थान प्रणाली मुख्य रूप से तीन चरणों (Stages) में काम करती थी:
चरण - 1: झील से प्राथमिक संग्रहण तक
इस शुरुआती चरण में पानी को सीधे मावठा झील से ऊपर खींचा जाता था।
प्रक्रिया: केसर क्यारी बगीचे की पूर्वी दीवार के सहारे स्थित पानी खींचने की चरखियों और बैलों/पशुओं की मदद से मावठा झील से पानी ऊपर खींचा जाता था।
संग्रहण और परिवहन: इस पानी को केसर क्यारी के ऊपरी तल पर बने दो संग्रहण टाँकों (Storage Tanks) में डाला जाता था। इन टाँकों का अगला सिरा मिट्टी से बनी (clay pipes) लगभग 125 मीटर लंबी पाइप लाइन से जुड़ा हुआ था।
परिणाम: इस लंबी पाइप लाइन के माध्यम से पानी बहकर दूसरे चरण की प्रणाली के भूतल (Base) पर बने एक अन्य संग्रहण टांके में पहुँच जाता था।
चरण - 2: बहु-मंजिला लिफ्टिंग प्रणाली (चड़स और चरखियाँ)
यह चरण पानी को महल की ऊंचाई तक ले जाने का सबसे मुख्य और कठिन हिस्सा था।
संरचना: महल की दक्षिण-पूर्वी दिशा में एक चार मंजिला (4 separate but connected structures) प्रणाली बनाई गई थी। इस संरचना के प्रत्येक तल (मंजिल) पर एक संग्रहण टांका होता था और पानी खींचने के लिए चरखियाँ लगी होती थीं।
ऊंचाई और लिफ्टिंग: यहाँ पशु बल की मदद से चमड़े के थैलों (चड़स) और रस्सियों द्वारा पानी को एक मंजिल से दूसरी मंजिल पर खींचा जाता था। प्रत्येक तल पर पानी को लगभग 10 से 13 मीटर की ऊँचाई तक खींचना होता था।
परिणाम: इस क्रमिक (step-by-step) लिफ्टिंग प्रक्रिया के जरिए पानी को केसर क्यारी के टांकों से लगभग 45 मीटर की कुल ऊँचाई पर स्थित बलिदान पोल (ध्रुव पोल) के प्रथम तल तक सफलतापूर्वक पहुँचा दिया जाता था।
चरण - 3: रहट प्रणाली (Persian Water Wheel) और महल में वितरण
यह इस जल उत्थान प्रणाली का अंतिम और सबसे आधुनिक चरण था।
रहट (साकिया) का उपयोग: अंतिम चरण में पानी को और ऊपर उठाने के लिए रहट (Persian Water Wheel) का उपयोग किया जाता था, जिसे फारसी में 'साकिया' भी कहा जाता है। इतिहास के अनुसार, पानी खींचने की यह पद्धति 500 ईसा पूर्व (500 BC) के समय से ही चलन में थी।
कार्यप्रणाली: इस प्रणाली में धुरी के रूप में एक विशाल लकड़ी का स्तंभ (wooden shaft) होता था। जब इसे घुमाया जाता था, तो पहिये पर लगी रस्सियाँ ऊपर-नीचे घूमती थीं। इस रस्सी से मिट्टी के बर्तन (earthen pots/buckets) बंधे होते थे, जो नीचे बने टांके में डूबकर पानी भरते थे और ऊपर आकर पानी को एक मुख्य कलेक्शन चैनल (नाली) में पलट देते थे।
महल में वितरण: इस कलेक्शन चैनल में एकत्र होने के बाद, पानी को मिट्टी के पाइपों (earthen pipes) के एक जाल (network) के जरिए पूरे आमेर महल में अलग-अलग जगहों पर उपयोग के लिए पहुँचा दिया जाता था।
निष्कर्ष: आमेर महल की यह त्रि-स्तरीय जल उत्थान प्रणाली इस बात का जीता-जागता सबूत है कि आधुनिक मोटरों और बिजली के बिना भी, हमारे पूर्वज गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देते हुए इतनी ऊंचाई पर पानी पहुंचाने की इंजीनियरिंग में कितने माहिर थे।
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डिस्क्लेमर (Disclaimer)
इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
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Tourism
