बैनाड़ भैरव बाबा की रहस्यमयी कहानी - Benar Bhairav Baba Mystery Story Jaipur

Benar Bhairav Baba Mystery Story Jaipur, इसमें जयपुर में बेनाड़ के भेरूजी मंदिर के बारे में जानकारी दी गई है।

Benar Bhairav Baba Mystery Story Jaipur

क्या आपने कभी ऐसी जगह के बारे में सुना है, जिसका नाम एक ऐसे वीर योद्धा के नाम पर पड़ा हो, जिसने सिर कटने के बाद भी दुश्मनों से लड़ाई जारी रखी?

राजस्थान की धरती पर ऐसी ही एक अद्भुत जगह है  बैनाड़, जो जयपुर के पास स्थित है।

जयपुर को “छोटी काशी” भी कहा जाता है। यहाँ लगभग हर चौराहे पर भैरव बाबा को रक्षक के रूप में पूजा जाता है। लेकिन बैनाड़ के भैरू बाबा की कहानी सबसे अलग, सबसे रहस्यमयी और सबसे चमत्कारी मानी जाती है।

बहुत-बहुत साल पहले यहाँ एक भयानक युद्ध हुआ था। उस युद्ध में एक बहादुर योद्धा की “नाड़” यानी गर्दन कट गई। लेकिन हैरानी की बात यह थी कि सिर कटने के बाद भी उसका धड़ तलवार लेकर दुश्मनों से लड़ता रहा।

लोगों ने उस वीर को “बिना नाड़ वाला योद्धा” कहा। इसी याद में इस जगह का नाम पड़ा  बैनाड़।

इतिहास के अनुसार, लगभग 600 साल पहले बैनाड़ की जागीर आमेर के महाराजा किल्हण राज के पुत्र खींवराज के पास थी। उनके वंशज आगे चलकर धीरावत राजपूत कहलाए।


इस परिवार का योगदान आमेर और जयपुर के इतिहास में बहुत बड़ा रहा। यहाँ तक कि अकबर की मृत्यु के बाद सलीम (जहांगीर) को गद्दी पर बैठाने में भी इनके पूर्वजों की अहम भूमिका रही थी।

आज भी बैनाड़ के लोग मानते हैं कि भैरव बाबा स्वयं शिव के अवतार हैं और जयपुर के असली कोतवाल हैं।
पुरानी मान्यता के अनुसार,

बाबा रात 1:30 बजे से 3:45 बजे तक सफेद घोड़े पर सवार होकर बैनाड़ की गलियों में पहरा देते हैं। यहाँ मौजूद 401 साल पुराने किले के खंडहर आज भी उस वीर समय की कहानी सुनाते हैं।

जयपुर की सड़कों की पहचान भी भैरव मंदिरों से होती है, जैसे —

कुंदीगर भैरवजी — जिनके नाम से जौहरी बाजार का रास्ता जाना जाता है।
खोजड़े के भैरवजी — जिनसे चांदपोल का रास्ता पहचाना जाता है।
हर्षनाथ भैरू — जो आमेर में नरमुंड का तकिया लगाकर विश्राम करते हैं।

भक्ति, शक्ति, वीरता और रहस्य, इन सबका ऐसा संगम सिर्फ राजस्थान में ही देखने को मिलता है।

अगली बार जब आप बैनाड़ की गलियों से गुजरें, तो उस “बिना नाड़” वाले जांबाज़ योद्धा को मन से प्रणाम करना मत भूलिएगा


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