नीमच-खीमज माता मंदिर - Nimach Khimaj Mata Mandir Nagda Udaipur

Nimach Khimaj Mata Mandir Nagda Udaipur, इसमें उदयपुर के पास मेवाड़ की प्राचीन राजधानी नागदा में पहाड़ी पर मौजूद नीमच-खीमज माता मंदिर की जानकारी दी है।

Nimach Khimaj Mata Mandir Nagda Udaipur

राजस्थान के उदयपुर जिले में स्थित एकलिंगजी मंदिर के पास अरावली की सुंदर पहाड़ियों के बीच नीमच माता और खीमज माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। यह स्थान धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक तरफ माता के दर्शन का सुख मिलता है, तो दूसरी तरफ पहाड़ियों और झीलों का मनमोहक दृश्य दिल को शांति देता है।

कहां स्थित है यह मंदिर


यह मंदिर उदयपुर शहर से लगभग 22 किलोमीटर दूर कैलाशपुरी क्षेत्र में एकलिंगजी मार्ग पर बाघेला तालाब के पास स्थित है। मंदिर पहाड़ी पर बना हुआ है। आधी दूरी तक पक्की सड़क बनी हुई है, लेकिन उसके बाद करीब 250 मीटर पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है।

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां 52 सीढ़ियां और रेलिंग भी लगाई गई हैं, जिससे पहाड़ी पर चढ़ना पहले की तुलना में आसान और सुरक्षित हो गया है। मंदिर लगभग 150 फीट ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। स्थानीय भाषा में इस पहाड़ी को “वरा री खादड़ी” कहा जाता है।

दो बहनों के रूप में पूजी जाती हैं माताएं


लोकमान्यता के अनुसार नीमच माता और खीमज माता दोनों सगी बहनें हैं। कहा जाता है कि दोनों देवियों ने अलग-अलग पहाड़ियों को अपना स्थान चुना था।

नीमच माता शहर की ओर वाली पहाड़ी पर विराजीं, जबकि खीमज माता पास की दूसरी पहाड़ी पर विराजमान हुईं। दोनों मंदिरों से दिखाई देने वाले दृश्य भी अलग-अलग हैं।

👉 नीमच माता मंदिर से फतहसागर झील का सुंदर दृश्य दिखाई देता है।
👉 खीमज माता मंदिर से बाघेला तालाब का मनोरम नजारा दिखाई देता है।

बताया जाता है कि नीमच माता का रंग सांवला है, जबकि खीमज माता गौर वर्ण में विराजित हैं।

माता के स्वरूप की खास बातें


मंदिर में नीमच माता का स्वरूप चारभुजाधारी है और वे पाड़े पर विराजित हैं। वहीं खीमज माता महिषासुर मर्दिनी के रूप में शेर पर सवार दिखाई देती हैं। उनका स्वरूप भी चारभुजाधारी है।


लोग मानते हैं कि ये माताएं अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी करती हैं।

करीब 800 साल पुराना है मंदिर


यह मंदिर लगभग 800 साल पुराना माना जाता है। प्राचीन समय में यह पूरा क्षेत्र नागदा नगरी कहलाता था, जो कभी मेवाड़ की राजधानी हुआ करता था।

कहा जाता है कि मेवाड़ की रक्षा के लिए इस क्षेत्र में पांच प्रमुख माताओं के मंदिर स्थापित किए गए थे। इनमें राठासेन माता, मालासन माता, अर्बुदा देवी और नीमच-खीमज माता प्रमुख थीं।

बताया जाता है कि तेरहवीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के शासक शम्सुद्दीन इल्तुतमिश ने नागदा क्षेत्र पर हमला किया था। उस समय कई मंदिरों और घरों को तोड़ दिया गया था।

माना जाता है कि नीमच-खीमज माता मंदिर भी उसी हमले में प्रभावित हुआ था। आज भी इस क्षेत्र में टूटे हुए मंदिरों और पुराने अवशेषों के निशान देखे जा सकते हैं।

चोरी हो गई थी माता की प्रतिमा


मंदिर के इतिहास में एक घटना बहुत प्रसिद्ध है। करीब 40 साल पहले खीमज माता की प्रतिमा चोरी हो गई थी। बाद में देलवाड़ा थाना पुलिस ने उस प्रतिमा को बरामद कर लिया।

इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर प्रतिमा को वापस मंदिर में लाया गया। वर्ष 2012 में मेवाड़ राजपरिवार के सदस्य अरविंद सिंह मेवाड़ ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और माता की प्रतिमा को दोबारा विधि-विधान से स्थापित करवाया।

कई समाजों की कुलदेवी हैं माताएं


इस मंदिर के प्रति सभी लोगों की विशेष आस्था है और कई समाज के लोग इन माताओं को अपनी कुलदेवी मानते हैं।

नवरात्रि और विशेष पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचते हैं। भक्तों का विश्वास है कि माता के दरबार में मांगी गई सच्ची मनोकामना जरूर पूरी होती है।

प्राकृतिक सुंदरता लोगों को खींच लाती है


यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी बहुत खास जगह है। अरावली की पहाड़ियों, झीलों और शांत वातावरण के बीच बना यह स्थान लोगों को अलग ही सुकून देता है।

पहाड़ी से दिखाई देने वाले दृश्य इतने सुंदर लगते हैं कि यहां आने वाले लोग लंबे समय तक इस जगह को याद रखते हैं। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय यहां का नजारा और भी अधिक आकर्षक दिखाई देता है।

मंदिर की देखरेख कौन करता है


वर्तमान में मंदिर की देखरेख एकलिंगनाथ ट्रस्ट द्वारा की जाती है। ट्रस्ट यहां नियमित पूजा-पाठ, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं का संचालन करता है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समय-समय पर विकास कार्य भी करवाए जाते हैं।

निष्कर्ष


नीमच-खीमज माता मंदिर मेवाड़ की आस्था, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का अनमोल संगम है। अरावली की पहाड़ियों में स्थित यह मंदिर आज भी श्रद्धालुओं के लिए विश्वास और भक्ति का बड़ा केंद्र बना हुआ है।

यहां का शांत वातावरण, प्राचीन इतिहास और माता के प्रति लोगों की गहरी आस्था इस स्थान को राजस्थान के खास धार्मिक स्थलों में शामिल करती है।



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
Ramesh Sharma

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