राम जानकी मंदिर के बगल में सुंदर बावड़ी - Palsaniya Baori Khandela

Palsaniya Baori Khandela, इसमें खंडेला में स्थित पलसानिया बावड़ी के बारे में जानकारी दी गई है।



खंडेला की बावड़ियों में एक महत्वपूर्ण बावड़ी है पलसानिया की बावड़ी। जैसा कि नाम से विदित हो रहा है कि इस बावड़ी का सम्बन्ध किसी पलसानिया परिवार या इसके किसी सदस्य से रहा है।

यह बावड़ी उदयपुरवाटी मार्ग पर चुंगी नंबर दो पर राम जानकी मंदिर के बिलकुल पीछे एकदम सटकर स्थित है। यह बावड़ी खंडेला की एकमात्र बावड़ी है जो उदयपुरवाटी मार्ग पर स्थित है।

राम जानकी मंदिर की छत पर बजरंगबली की विशाल प्रतिमा स्थित है। दूर से इस प्रतिमा को देखने पर यह आभास होता है जैसे यह प्रतिमा बावड़ी की दीवार पर स्थित है।

इस बावड़ी का मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना में जीर्णोद्धार हो जाने से इसका मौलिक स्वरूप खो गया है। मूल स्वरुप में नहीं होने से अब यह प्राचीन प्रतीत नहीं होती है।

बावड़ी की लम्बाई और चौड़ाई बहुत अधिक नहीं है लेकिन बावड़ी की गहराई तीन तलों की है। सबसे नीचे के तल तक जाने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई है।

ऐसा लगता है कि प्राचीन समय में यह बावड़ी और राम जानकी का मंदिर दोनों एक ही परिसर में थे।

अगर आप प्राचीन धरोहरों को करीब से देखकर उन्हें जानने के इच्छुक हैं तो आपको खंडेला में स्थित इस बावड़ी को अवश्य देखना चाहिए।

पलसानिया बावड़ी की मैप लोकेशन - Map Location of Palsaniya Baori



पलसानिया बावड़ी का वीडियो - Video of Palsaniya Baori



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
Ramesh Sharma

मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।

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