पिछोला झील में बोटिंग का मजा - Boating in Lake Pichhola

Boating in Lake Pichhola, इसमें उदयपुर की प्रसिद्ध पिछोला झील में बोटिंग करने के बारे में जानकारी दी गई है।

Boating in Lake Pichhola

अगर आप झीलों की नगरी उदयपुर में जाएँ और वहाँ पिछोला झील में बोटिंग का आनंद नहीं उठायें तो आपकी उदयपुर यात्रा अधूरी रह जाएगी। पिछोला झील में बोटिंग एक प्रमुख आकर्षण है।

झील में लगभग पंद्रह से बीस मिनट बोटिंग करवाई जाती है जिसके लिए दो प्रकार का टिकट है। टेन सीटर लक्जरी स्पेशल बोट के लिए 300 रुपए और थर्टी सीटर मोटर बोट के लिए 150 रुपए का टिकट है।

पिछोला झील में बोटिंग करने से मेवाड़ी स्थापत्य कला के साथ-साथ इसकी नैसर्गिक सुन्दरता की झलक भी दिखाई देती है। झील से महल, और घाटों का वो रूप देखने को मिलता है जो रूप दूसरी जगह से देखने को नहीं मिल सकता है।

स्थिर जल को चीरकर उसमें लहरे पैदा करते हुए जब बोट आगे बढती है तब मन रोमांच से भर उठता है। चारों तरफ पानी ही पानी बड़ा मनमोहक दृश्य पैदा करता है।


बोटिंग के दौरान पूरी झील का एक बड़ा चक्कर लगाया जाता है। बोटिंग की शुरुआत में सिटी पैलेस (City Palace) के पीछे का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। यहाँ से सिटी पैलेस का एक अलग ही रूप दिखाई देता है।

इसके बाद में बागोर की हवेली (Bagore Ki Haveli) और गणगौरी घाट (Gangauri Ghat) का सुन्दर नजारा होता है। आगे जाने पर अमराई घाट (Amrai Ghat) दिखाई देता है।

बाई तरफ देखने पर विश्व प्रसिद्ध लेक पैलेस होटल (Lake Palace Hotel) दिखाई देती है। इस होटल में ठहरने का किराया लाखों रुपए प्रतिदिन के हिसाब से बताया जाता है। रियासत काल में इसे जग निवास (Jag Niwas) कहा जाता था।

लेक पैलेस से आगे जाने पर जग मंदिर (Jag Mandir) दिखाई देता है। यह जगह बड़ी ऐतिहासिक है। जब शाहजहाँ ने बादशाह जहाँगीर के खिलाफ विद्रोह किया था तब मेवाड़ के महाराणा कर्ण सिंह ने उन्हें शरण दी थी और शाहजहाँ को इसी जग मंदिर में ठहराया था।

जग मंदिर से फिर बोट वापस वहीं लौट आती है जहाँ से शुरुआत हुई थी। इस प्रकार लगभग पंद्रह से बीस मिनट के समय में पिछोला की यात्रा पूर्ण होती है।

पिछोला झील की मैप लोकेशन - Map Location of Lake Pichola Municipal Boat Ride Point



पिछोला झील में बोटिंग का वीडियो - Video of Lake Pichhola



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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
Ramesh Sharma

मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।

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