पत्थर पर जीवंत होता सुंदरकांड - SunderKand on Meera Mandir Ahar Udaipur

SunderKand on Meera Mandir Ahar Udaipur, इसमें उदयपुर के आहाड़ के प्राचीन विष्णु मंदिर यानी मीरा मंदिर के ऊपर मौजूद सुंदरकांड के बारे में जानकारी है।

SunderKand on Meera Mandir Ahar Udaipur

राजस्थान की ऐतिहासिक धरती मेवाड़ (उदयपुर) का आहाड़ यानी आयड़ न केवल अपनी 4 हजार साल पुरानी सभ्यता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यह 10वीं शताब्दी की उत्कृष्ट गुहिल कला का भी जीवंत केंद्र रहा है।

यहाँ स्थित प्राचीन विष्णु मंदिर (जिसे 'मीरा मंदिर' या 'आदिवराह मंदिर' भी कहा जाता है) की उत्तरी भित्ति पर पत्थर का एक ऐसा पैनल उत्कीर्ण है, जो पूरी दुनिया में बेजोड़ है।

यह शिल्प मात्र एक प्रतिमा नहीं, बल्कि पत्थर पर उकेरी गई वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड की पूरी गाथा है।

एक ही फ्रेम में पूरी कथा: शिल्पकारी का अद्भुत चमत्कार


आमतौर पर प्राचीन प्रतिमाएँ किसी एक विशेष दृश्य या मुद्रा तक सीमित रहती हैं, लेकिन आहाड़ का यह चौकोर पैनल कथा की निरंतरता का उत्कृष्ट उदाहरण है।

इसमें हनुमानजी के चार अलग-अलग रूपों और उनके विराट चरित्र को एक साथ पिरोया गया है। 10वीं शताब्दी में बहुआयामी मूर्ति प्रयोग का यह भारत में कदाचित पहला और अनूठा उदाहरण है।


इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू के अनुसार, वाल्मीकि रामायण के अध्याय 18 से 46 तक के प्रसंगों को एक ही पत्थर के टुकड़े पर समेट देना किसी सामान्य कलाकार के वश की बात नहीं थी।

सुंदरकांड के पांच प्रमुख प्रसंग


इस पैनल में महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित संस्कृत शब्दावली और सुंदरकांड के पांच महत्वपूर्ण पड़ावों को बारीकी से दिखाया गया है:

1. हनुमानजी बाल स्वरूप में माता सीता के सम्मुख उपस्थित होकर उन्हें श्री राम का संदेश देते हैं और विश्वास दिलाते हैं।

2. अशोक वाटिका को उजाड़ने के दौरान हनुमानजी का शौर्य और अक्षय कुमार का वध।

3. शोक में डूबी और दुर्बल अवस्था में बैठी माता सीता को पहचानना और उनके कष्ट का साक्षी बनना।

4. अपनी पूंछ का विस्तार कर पूरी लंका को अग्नि के हवाले करने का अतुलित साहस।

5. लंका दहन के पश्चात दोषी के रूप में दशानन रावण के सामने निर्भीकता से खड़े हनुमानजी।

शिल्प की सूक्ष्म विशेषताएँ


इस पैनल में कलाकार ने सूक्ष्म विवरणों का खास ध्यान रखा है। इसमें अशोक वाटिका का दो शाखाओं वाला वृक्ष, उसके नीचे बैठी माता सीता, उन्हें डराती और रावण के प्रस्ताव के लिए मनाती राक्षसी, और हनुमानजी द्वारा अंगूठी सौंपने का दृश्य अत्यंत भावपूर्ण है।

हनुमानजी के छोटे रूप से लेकर उनके विकट स्वरूप तक की यात्रा एक ही पत्थर में प्रवाहित होती दिखती है।

वैभवशाली मेवाड़ और व्यापारिक केंद्र


10वीं शताब्दी में जब गुहिल शासक अल्लट और शक्तिकुमार का शासन था, तब आहाड़ समृद्धि के शिखर पर था। यह क्षेत्र यशद (जिंक) और चांदी जैसी धातुओं का बड़ा केंद्र था। यहाँ चोल (कर्नाटक), लाट (गुजरात) और टक्क (पंजाब) के व्यापारियों का जमावड़ा रहता था।

ये व्यापारी रेशम मार्ग के जरिए चीन और बसरा तक व्यापार करते थे। इसी आर्थिक समृद्धि और धार्मिक आस्था के संगम से यहाँ वैष्णव और जैन मंदिरों का निर्माण हुआ, जो आज भी हमारी सांस्कृतिक विरासत का गौरव हैं।

निष्कर्ष


आहाड़ का यह मंदिर न केवल विष्णु पुराण और भागवत के प्रसंगों को सहेजे हुए है, बल्कि यह पैनल प्राचीन गुहिल कला और रामायण के प्रति तत्कालीन समाज की गहरी आस्था का प्रमाण है। आज भी जब हम इस शिल्प को देखते हैं, तो ऐसा लगता है मानो पत्थर बोल रहे हों और अंजनीपुत्र हनुमान आज भी उस युग की तरह जीवित और जाग्रत हों।


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डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में शैक्षिक उद्देश्य के लिए दी गई जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों से ली गई है जिनकी सटीकता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। आलेख की जानकारी को पाठक महज सूचना के तहत ही लें क्योंकि इसे आपको केवल जागरूक करने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता की ही रहेगी।
Ramesh Sharma

मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ।

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