खुमाण रावल का देवरा - Khuman Rawal Ka Devra Nagda Udaipur

Khuman Rawal Ka Devra Nagda Udaipur, इसमें उदयपुर के पास नागदा की पहाड़ियों में बाघेला झील के पास खुमान रावल के देवरे यानी शिव मंदिर की जानकारी दी है।

Khuman Rawal Ka Devra Nagda Udaipur

अरावली की शांत पहाड़ियों के बीच एक ऐसा मंदिर छिपा है, जहाँ कभी शिल्पकारों की कला पत्थरों में साँस लेती थी और भगवान शिव की आराधना से पूरा वातावरण गूंज उठता था।

लेकिन आज…
वही मंदिर खंडहर बनकर खामोशी से अपनी कहानी सुना रहा है।

उदयपुर के पास नागदा की पहाड़ियों में स्थित “खुम्माण रावल का देवरा” सिर्फ एक शिव मंदिर नहीं, बल्कि मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास की जीवित गाथा है।

दिल्ली सल्तनत के इल्तुतमिश द्वारा नष्ट किए जाने से पहले नागदा, मेवाड़ की राजधानी थी जिसमें सैंकड़ों मंदिर थे। मेवाड़ में खुमान नाम के तीन राजा हुए थे जिनमें किसी एक ने इस मंदिर को बनवाया था।

कहा जाता है कि इस मंदिर का नृत्य मंडप इतना अद्भुत था कि यहाँ की पत्थर की नक्काशी देखकर लगता था जैसे मूर्तियाँ अभी जीवित होकर नृत्य करने लगेंगी।

इतिहास बताता है कि इस मंडप में आठ नर्तकियों की अनुपम प्रतिमाएँ स्थापित थीं। उनकी मुद्रा, आभूषण और भाव इतने जीवंत थे कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता था।

लेकिन आज…
वे सभी प्रतिमाएँ गायब हैं।

समय के साथ-साथ इस धरोहर पर सिर्फ प्रकृति की मार नहीं पड़ी, बल्कि इंसानी लालच ने भी इसे बुरी तरह लूटा। तस्करों ने मंदिर के गर्भगृह से भगवान शिव की मुख्य प्रतिमा तक चुरा ली। कई कीमती शिलाखंड और स्थापत्य के अद्भुत नमूने भी उखाड़ कर ले जाए गए।

आज इस मंदिर में केवल खंडित शिवलिंग और नंदी बचे हैं, जो मानो हमारी लापरवाही की मूक गवाही दे रहे हों।

हैरानी की बात यह है कि यहाँ राजकीय संरक्षित स्मारक का बोर्ड लगा होने के बावजूद मंदिर के फर्श तक के पत्थर उखाड़ लिए गए।

यह मंदिर श्री एकलिंग जी ट्रस्ट की निजी संपत्ति है, लेकिन आज इसे तत्काल संरक्षण और पुनर्जीवन की जरूरत है।

सोचिए…
जहाँ कभी शिव स्तुति की गूँज होती थी, वहाँ आज सिर्फ वीरानी पसरी है।

क्या हम अपने इतिहास की इस अमूल्य धरोहर को ऐसे ही मिटने देंगे?
या फिर समय रहते इसे बचाने के लिए आवाज़ उठाएँगे?

“खुम्माण रावल का देवरा” सिर्फ एक मंदिर नहीं…
यह मेवाड़ की आत्मा का एक अनमोल हिस्सा है।



सोशल मीडिया पर हमसे जुड़ें (Connect With Us on Social Media)


डिस्क्लेमर (Disclaimer)

इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य सूचना एवं जागरूकता के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई है। यह जानकारी विभिन्न ऑनलाइन एवं ऑफलाइन स्रोतों, उपलब्ध सूचनाओं तथा लेखक के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। यद्यपि जानकारी को यथासंभव सही एवं उपयोगी रखने का प्रयास किया गया है, इसकी सटीकता, पूर्णता एवं विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती।

पाठक इस जानकारी को केवल सामान्य सूचना के रूप में लें और किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय या उपयोग से पहले संबंधित आधिकारिक स्रोत से इसकी पुष्टि अवश्य करें। इस लेख में दी गई जानकारी के उपयोग से होने वाले किसी भी परिणाम की जिम्मेदारी पाठक/उपयोगकर्ता की स्वयं की होगी।
Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

Post a Comment

Previous Post Next Post