लाल पत्थरों से बना शानदार महलों वाला जूनागढ़ किला - Junagarh Fort Bikaner

Junagarh Fort Bikaner, इसमें लाल पत्थरों से बने हुए और शानदार महलों वाले बीकानेर के जूनागढ़ किले के बारे में जानकारी दी गई है।

Junagarh Fort Bikaner

राजस्थान के बीकानेर शहर में स्थित जूनागढ़ किला अपनी भव्यता, खूबसूरत महलों और ऐतिहासिक कहानियों के लिए प्रसिद्ध है। इस किले की सबसे खास बात यह है कि राजस्थान के अनेक प्रसिद्ध किलों के विपरीत, यह किसी ऊँची पहाड़ी पर नहीं, बल्कि मैदानी क्षेत्र में बनाया गया है। इसकी मजबूत दीवारें, विशाल दरवाजे और शानदार महल पुराने समय की स्थापत्य कला की अद्भुत मिसाल पेश करते हैं।

राव बीका से जुड़ा है किले का इतिहास

जूनागढ़ किले का इतिहास समझने के लिए बीकानेर के संस्थापक राव बीका के बारे में जानना जरूरी है। राव बीका, जोधपुर के संस्थापक राव जोधा के पुत्र थे।

उन्होंने 1488 ईस्वी में बीकानेर राज्य की स्थापना की थी। उनके द्वारा बसाया गया यह शहर आगे चलकर राजस्थान के प्रमुख ऐतिहासिक नगरों में शामिल हो गया।

हालाँकि, आज जिस भव्य जूनागढ़ किले को हम देखते हैं, उसका निर्माण बीकानेर के छठे शासक महाराजा राय सिंह ने करवाया था।

निर्माण कार्य 1589 ईस्वी में शुरू हुआ और 1594 ईस्वी में पूरा हुआ। इस तरह राव बीका का संबंध बीकानेर राज्य की स्थापना से है, जबकि वर्तमान जूनागढ़ किले का श्रेय महाराजा राय सिंह को दिया जाता है।

किले का पुराना नाम क्या था?

जूनागढ़ किले का पुराना नाम चिंतामणि दुर्ग बताया जाता है। 20वीं सदी की शुरुआत में जब बीकानेर का शाही परिवार लालगढ़ महल में रहने लगा, तब इस किले को जूनागढ़ कहा जाने लगा। जूनागढ़ का अर्थ होता है पुराना किला।

किले की मजबूत प्राचीरें, बुर्ज और सुरक्षा के लिए बनाई गई खाई इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। लाल बलुआ पत्थर और संगमरमर से बने इस दुर्ग में राजपूत तथा मुगल स्थापत्य कला का सुंदर मेल देखने को मिलता है।

सूरज पोल पर हाथियों पर सवार वीर योद्धाओं की प्रतिमाएँ

जूनागढ़ किले के प्रमुख प्रवेश द्वारों में सूरज पोल का विशेष स्थान है। इसकी एक आकर्षक पहचान हाथियों पर सवार दो वीर योद्धाओं की प्रतिमाएँ हैं, जिन्हें जयमल मेड़तिया और पत्ता चूंडावत के रूप में पहचाना जाता है।

इन दोनों योद्धाओं का संबंध चित्तौड़गढ़ दुर्ग की ऐतिहासिक लड़ाई से है। वर्ष 1567–1568 में मुगल सम्राट अकबर की सेना ने चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण किया था।

इस दौरान जयमल और पत्ता ने दुर्ग की रक्षा करते हुए वीरता का परिचय दिया। उनकी बहादुरी और बलिदान की कहानियाँ राजस्थान के इतिहास में आज भी याद की जाती हैं।

किले के प्रवेश द्वार पर स्थापित ये प्रतिमाएँ राजपूत वीरता और बलिदान की परंपरा का प्रतीक मानी जाती हैं। इन्हें देखकर एहसास होता है कि राजस्थान के इतिहास में वीर योद्धाओं को कितना सम्मान दिया गया है।

किले के अंदर बने हैं शानदार महल

जूनागढ़ किले की असली खूबसूरती इसके अंदर बने ऐतिहासिक महलों में दिखाई देती है। यहाँ अनूप महल, करण महल, फूल महल, चंद्र महल, मोती महल और बादल महल जैसे कई आकर्षक हिस्से हैं।

अलग-अलग शासकों ने अपने समय में किले में नए भवन और महल बनवाए, जिससे इसकी वास्तुकला और भी समृद्ध होती गई।

अनूप महल अपनी सुनहरी सजावट और बारीक कलाकारी के लिए प्रसिद्ध है। फूल महल की सजावट और शीशे का काम आकर्षित करता है, जबकि करण महल अपनी राजसी बनावट के लिए जाना जाता है।

बादल महल की दीवारों पर बने बादलों के चित्र इसे बाकी महलों से अलग पहचान देते हैं। यहाँ की चित्रकारी और सजावट देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि उस समय के शिल्पकार कितने कुशल थे।

मंदिर, दरवाजे और संग्रहालय

किले के भीतर हर मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर जैसे धार्मिक स्थल भी हैं। किले के विशाल प्रवेश द्वार और उनके आसपास की कलाकारी इसकी ऐतिहासिक सुंदरता को और बढ़ाते हैं।

यहाँ की स्थापत्य कला में धार्मिक आस्था, शाही जीवन और सुरक्षा व्यवस्था का सुंदर संगम दिखाई देता है। किले में स्थित संग्रहालय भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

इसमें पुराने हथियार, शाही वस्त्र, आभूषण, चित्रकलाएँ, पांडुलिपियाँ और राजपरिवार से जुड़ी अनेक ऐतिहासिक वस्तुएँ देखी जा सकती हैं।

इन वस्तुओं के माध्यम से बीकानेर के शासकों के रहन-सहन और उस समय की संस्कृति को समझने का अवसर मिलता है।

जूनागढ़ किले में रखा है प्रथम विश्वयुद्ध का विमान

इस किले की एक अनोखी विशेषता यहाँ रखा ऐतिहासिक द्विपंखी विमान भी है। प्रचलित ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, ब्रिटिश सरकार ने प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान बीकानेर राज्य की सेनाओं के योगदान के सम्मान में महाराजा गंगा सिंह को यह विमान भेंट किया था। आज यह किले के ऐतिहासिक आकर्षणों में शामिल है।

क्या किले में छिपा है कोई खजाना?

जूनागढ़ किले को लेकर छिपे हुए खजाने की कहानियाँ भी सुनने को मिलती हैं। ऐसा कहा जाता है कि पुराने समय में राजा-महाराजा अपनी संपत्ति को सुरक्षित स्थानों पर छिपाकर रखते थे।

हालाँकि, इस किले में सोने के बिस्कुट मिलने या किसी गुप्त खजाने के मौजूद होने की कहानियों की पुष्टि करने वाला विश्वसनीय प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें ऐतिहासिक तथ्य के बजाय प्रचलित चर्चाओं और मान्यताओं के रूप में ही देखना चाहिए।

राजस्थान की अनमोल ऐतिहासिक धरोहर

जूनागढ़ किला केवल एक दुर्ग नहीं, बल्कि बीकानेर के इतिहास, संस्कृति और शाही वैभव का प्रतीक है। इसकी विशाल दीवारों से लेकर सुनहरी कलाकारी वाले महलों, प्राचीन मंदिरों और संग्रहालय तक, हर हिस्सा अपने भीतर एक अलग कहानी समेटे हुए है।

सूरज पोल पर स्थापित वीर योद्धाओं की प्रतिमाएँ इस ऐतिहासिक धरोहर को राजस्थान की शौर्य परंपरा से भी जोड़ती हैं।

यदि आप राजस्थान की ऐतिहासिक धरोहरों, राजपूत स्थापत्य कला और वीरता की कहानियों को करीब से जानना चाहते हैं, तो बीकानेर का जूनागढ़ किला आपकी यात्रा सूची में जरूर होना चाहिए।

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Ramesh Sharma

नमस्ते! मेरा नाम रमेश शर्मा है। मैं एक रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट हूँ और मेरी शैक्षिक योग्यता में M Pharm (Pharmaceutics), MSc (Computer Science), MA (History), PGDCA और CHMS शामिल हैं। मुझे भारत की ऐतिहासिक धरोहरों और धार्मिक स्थलों को करीब से देखना, उनके पीछे छिपी कहानियों को जानना और प्रकृति की गोद में समय बिताना बेहद पसंद है। चाहे वह किला हो, महल, मंदिर, बावड़ी, छतरी, नदी, झरना, पहाड़ या झील, हर जगह मेरे लिए इतिहास और आस्था का अनमोल संगम है। इतिहास का विद्यार्थी होने की वजह से प्राचीन धरोहरों, स्थानीय संस्कृति और इतिहास के रहस्यों में मेरी गहरी रुचि है। मुझे खास आनंद तब आता है जब मैं कलियुग के देवता बाबा खाटू श्याम और उनकी पावन नगरी खाटू धाम से जुड़ी ज्ञानवर्धक और उपयोगी जानकारियाँ लोगों तक पहुँचा पाता हूँ। इसके साथ मुझे अलग-अलग एरिया के लोगों से मिलकर उनके जीवन, रहन-सहन, खान-पान, कला और संस्कृति आदि के बारे में जानना भी अच्छा लगता है। साथ ही मैं कई विषयों के ऊपर कविताएँ भी लिखने का शौकीन हूँ। एक फार्मासिस्ट होने के नाते मुझे रोग, दवाइयाँ, जीवनशैली और हेल्थकेयर से संबंधित विषयों की भी अच्छी जानकारी है। अपनी शिक्षा और रुचियों से अर्जित ज्ञान को मैं ब्लॉग आर्टिकल्स और वीडियो के माध्यम से आप सभी तक पहुँचाने का प्रयास करता हूँ। 📩 किसी भी जानकारी या संपर्क के लिए आप मुझे यहाँ लिख

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